प्यार का मुकाम

किसी – किसी की किस्मत में सच्चे प्यार के नाम पर कुछ रहता है तो बस खुद की वफा और सारी जिंदगी खत्म न होने वाला इंतजार।
जिंदगी के आखिरी पड़ाव तक पहुंचते -पहुंचते प्रिया को एहसास होता है कि अब तक वो न जाने कितनी झूठी खुशी झूठी उम्मीदों और फरेबी सपनों की दुनियां के बीच जीती रही।
सही मायनों में जिंदगी की खूबसूरती क्या होती है, वो तो अब उसको पता चल रही है ।
सात साल प्रिया प्रनव के प्यार में इस उम्मीद में जीती रही कि कभी तो प्रनव उसको अपनी जीवनसंगिनी बनाकर उसके प्यार को सात जन्मों के बंधन में बाँध लेगा। प्रिया के प्यार की इस उम्मीद के बीच प्रनव को खोने का डर हर एक पल प्रिया को सताया है । मगर कहते हैं न कि अगर किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलवाने में जुट जाती है ।
सात साल पहले प्रिया प्रनव से एक म्यूजिक शो में मिली थी, उस वक्त प्रनव सिंगर बनने के लिए काफ़ी स्ट्रगल कर रहा था, और प्रिया एक म्यूजिक डॉयरेक्टर के अॉफिस में एज अ राइटर जॉब के लिए अप्लाई करने बॉम्बे आई थी। प्रिया गानों के बोल इतना दिल से लिखती थी कि पहली बार में ही एक डॉयरेक्टर ने प्रिया के लिखे सारे गानों को खरीद लिया और उसको अपने ऑफिस में ही जॉब पर रख लिया । प्रिया बोल पाने में असमर्थ थी मगर उसके मन की आवाज इतनी स्ट्रांग थी कि बिन बोले ही प्रिया ने अपने २५ वर्ष की जिंदगी में बहुत कुछ हासिल कर लिया था, प्रिया का करियर सेट हो चुका था, मगर उसकी जिंदगी में कुछ अधूरा था तो वो बस सच्चा जीवनसाथी सच्चा प्यार ।
और प्रिया की ये तलाश खत्म होती है पहली बार प्रनव को देखकर ।
जब प्रिया ने पहली बार प्रनव को गाना गाते देखा तो उसको लगा कि प्रनव के गानों में कुछ अधूरापन है । बस इसी बहाने प्रिया प्रनव से मिलता है और प्रनव को उसकी सिंगिग के लिए बहुत सी बारिकिया समझाती है और वो प्रनव के लिए गाने लिखने लगी, मार्केट में प्रिया के लिखे गानों की बहुत डिमांड थी, मगर प्रिया ने इंडस्ट्री के सारे बड़े-बड़े ऑफर को इग्नोर कर सिर्फ प्रनव के लिए गाने लिखे। प्रिया के लिखे गानों ने प्रनव को इतनी शोहरत-दौलत दी कि वो एक बड़ा सिंगर बन गया, प्रनव एक बड़ा सेलेब्रेटी बन गया था बस प्रिया की बदौलत।
और प्रिया अपने करियर के इतने अच्छे मुकाम पर आकर सिर्फ प्रनव के पीछे ही भागती रह गई बस इस उम्मीद में कि आज नही तो कल प्रनव को उसके प्यार का एहसास होगा और वो उसको अपना बना लेगा। प्रिया बोल न सकी कभी मगर वो हमेशा बड़ी शिद्दत से प्रनव को अपने प्यार का एहसास दिलाने का प्रयास करती रही, मगर प्रनव अपनी कामयाबी की चकाचौंध में इतना अंधा हो चुका था कि उसको प्रिया का प्यार कभी नजर ही नही आया।
अब तो प्रिया के परिवार वालों ने भी प्रिया को ताने मारने शुरू कर दिए क्योंकि जिस शख्स के लिए प्रिया अपना सबकुछ भूल बैठी थी, उस शख्स की जिंदगी में प्रिया की कोई अहमियत ही नजर नहीं आती किसी को । मगर प्रिया इन सारी बातों को इग्नोर कर बस प्रनव को ही अपना सबकुछ मान कर उसका इंतजार करती रही । प्रनव की कामयाबी और प्रिया के प्यार के इंतजार को अब सात साल बाद एक नया मायना मिला, वो भी तब जब प्रिया की जिंदगी का बहुत कम वक्त बाकी रह गया।
प्रनव अपने जन्मदिन की पार्टी में प्रिया को इन्वायट करने प्रिया के घर आता है, प्रिया घर पर नहीं होती है और इसी मौेके को देख प्रिया की मासी प्रनव को प्रिया के दिल में उसके लिए बेइंतेहा प्यार के बारे में सबकुछ बताती है, प्रिया के इस बेपनाह प्यार को जानकर प्रनव को बहुत खुशनसीबी और दूसरी तरफ़ अफसोस भी होता है कि अब तक क्यों वो इस सबसे अंजान बना रहा ।
प्रनव उसी वक्त एक बहुत बड़ा सरप्राइज़ प्लान करता है प्रिया के लिए अपनी बर्थडे पार्टी में ।
प्रिया के सात साल के प्यार के इंतजार को बहुत ही खूबसूरत तरीके से अंजाम देना चाहता है।
प्रनव की बर्थडे पार्टी शुरू होती है, सारे मेहमान प्रनव के सारे दोस्त आ जाते हैं मगर प्रनव की नजरें एकटक दरवाजे पर सिर्फ प्रिया का ही इंतजार कर रही होती है, बहुत वक्त गुजरता है मगर प्रिया नहीं आती, प्रनव का मन बहुत बेचैन होने लगता है वो प्रिया को कॉल लगाता है मगर कॉल भी नहीं लगता, प्रनव के मन में कई तरह के ख्याल उमड़ने लगते हैं कि आखिर प्रिया क्यों नहीं आई। जैसे ही प्रनव प्रिया के घर जाने को निकलता है तभी सामने से प्रिया नजर आती है, प्रिया को आते देख प्रनव बहुत खुश होता है मगर अचम्भित भी होता है, सफेद साड़ी खुले बालों में एकदम सादगी में चेहरे पर एक अलग ही नूर छलक रहा, प्रिया एक देवी समान लग रही होती है । मगर प्रिया इस रूप में क्यों? सबके मन में यही सवाल उठता है । प्रिया एकदम शान्त मन में सरलता लिए प्रनव के पास आकर इशारों में प्रनव को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए एक उपहार देती है, प्रनव की नजरें एकटक बस प्रिया को ही निहारे जा रही होती है और बहुत से सवाल मन में उठ रहे होते हैं । प्रनव कुछ पूछता इससे पहले प्रिया वहां से जाने लगती है, प्रनव कोई सवाल किये बिना प्रिया का हाथ पकड़कर रोकते हुए घुटनों के बल बैठकर प्रिया को आई लव यू बोलता है, प्रिया प्रनव की आँखों में कुछ देर तक निहारते हुए अपना हाथ छुड़ाकर वहां से चली जाती है, प्रनव दिवानों की तरह प्रिया को रोकने की कोशिश करता है मगर प्रिया नही रुकती । इस बीच प्रिया की दोस्त वहां आकर प्रनव को बताती है कि तुमने बहुत देर कर दी है अपने प्यार तक पहुंचने में, प्रिया हम सबसे बहुत दूर जाने वाली है, प्रिया को ये नया रूप तुमने आज देखा है वो आज आखिरी समय के लिए तुम्हारे जन्मदिन पर खास तुम्हें कुछ एहसास दिलाने के लिए था, मगर अफ़सोस कि तुम आज भी प्रिया को समझ न पाये, प्रिया तुमको ये एहसास दिलाने आई थी कि सात सालों तक जिस शोहरत के पीछे तुम भागते रहे और अपनी सारी शोहरत को पीछे छोड़ प्रिया सिर्फ तुम्हारे पीछे दीवानी बनी भागती रही, आज वो सबकुछ एक झूठी उम्मीद एक अधूरा सपना बनकर रह गया है प्रिया के लिए, जिंदगी में जिस शख्स के लिए अपना सबकुछ गंवाती रही वो तो उसको मिला नहीं मगर इस बीच प्रिया ने अपनी जिंदगी की असली खूबसूरती को भी खो दिया, बस एक प्यार की खातिर प्रिया अपनी जिंदादिली को भी खो चुकी है, प्रिया को ब्रेन कैंसर है और जब ये बात प्रिया को पता चली तो उसके पास जिंदगी ही नहीं बची जीने के लिए, अब प्रिया के पास जीतना भी वक्त है वो अब किसी झूठी उम्मीद या अधूरे सपनों में नही जीना चाहती, प्रिया अपनी जिंदगी की सारी शिकायतें भुला कर सारी उम्मीदें छोड़कर बाकी की एक सरल जिंदगी जीना चाहती है, इसीलिए प्रिया अब सबसे दूर एक खास वक्त गुजारने और अपने मन की शांति के लिए अपनी पहले की जिंदगी त्याग ब्रह्मकुमारी में सम्मिलित हो जाती है, प्रिया को अब अपने जीवन में बहुत सुकून महसूस है किसी से कोई शिकायत नहीं रह गई है अब उसको ।
अपनी जिंदगी की सारी शोहरत प्रनव को देकर जिंदगी में जैसे सबकुछ हासिल कर लिया हो, एक ऐसा तेज आ गया है अब प्रिया के जीवन में, और प्रनव ने अपनी जिंदगी में सबकुछ पाकर भी जैसे सबकुछ खो दिया हो एक ऐसी बेबसी एक ऐसा अफसोस छा गया प्रनव के जीवन में ।

         

Share: