प्रेम की पराकाष्ठा

बात उन दिनों की सुमि रायपुर बैंक में लेखाधिकारी थी , और हम बेरोजगारी के महदंश से जूझते एक प्रायवेट कम्पनी में कारिंदे थे।
सुमि एक खूबसूरत पर तुनक मिजाज लड़की थी व लगभग सभी ग्राहक उससे बैंक स्टेटमेंट या बैंक पास बुक एंट्री करवाने से डरते थे फलस्वरूप कुछ न कुछ झिख जिख होना भी उस कॉउंटर पर लगभग सामान्य बात हो चुकी थी , हमे पर कभी उससे किसी प्रकार बैंक स्टेटमेंट लेने में परेशानी महसूस नहीं हुई।
कारण ?
कारण कुछ नहीं था , हम मौन उनके कॉउंटर के समीप खड़े हो जाते , जब वो फ्री होती स्वयं ही पूछती ,कैसे ,क्यों खड़े हो?
हम कंपनी का नाम बता स्टेट मेन्ट लेने की बात कह देते शुरू शुरू ने वे स्वयं स्टेटमेंट नकल कर देदेती पर लगभग प्रति सप्ताह हमारा स्टेटमेंट के लिए पहुचना , उसे नागवार गुजरा पर हमें कुछ बोलती नहीं थी स्टेट मेन्ट बना देदेती।
फिर एक दिन स्टेटमेंट काफी देर तक नहीं दी हम लगभग 2 घंटे से वही खड़े रहे , लंच का समय हुवा वो अन्य सहकर्मियों के साथ लंच को चली गयी।
हंमने भी चलो अब लंच के बाद काम होगा सोच बाहर कैंटीन में चले गए और एक काफी का आर्डर दे एक कोने के टेबिल पर बैठे
पानी निकाल पीने लगे ।
कि कुछ महिलाओं के बात करने के आवाज ने अपनी ओर ध्यान खींचा , फॅमिली केबिन के अंदर थे पर्दा लगा केबिन पर आवाज
एक ने कहा ,,आज तो सुमि तुम उसे काफी परेशान की , कितने देर खड़े करवा दी तुम?
कुछ जवाब पर अस्पष्ट, फिर अरे वो नहीं बोलता तो तू ही बोल दे?
अरे कैसे , इतने भीड़ में?
काफी आ चुकी थी हंमने काफी पीते आधे घंटे टाइम पास कर कुछ देर और कैसे बैठे यही सोच रहे थे कि केबिन से तीन सहकर्मी के साथ सुमि काखिलखिलाहट के साथ निकलना और हमारे से नजरो का मिलना ? और उन सबके चेहरे फक्क खिलखिलाहट एक गंभीरता में परिवर्तित हो गयी।
हमे कुछ समझ न आया ,पर उधेड़ बुन शुरू ।
ये लोग किसे परेशान कर रहे ।
बात आई गयी समाप्त।
3 बजे हम पुनः कॉउंटर के समीप खड़े हो गए , सुमि कुछ देर इढर उधर पन्ने पलटते हुवे हमे कनखियों से देखती फिर अपने काम पर लग व्यस्त होने की ?
उस दिन हमे अपने निजी कम्पनी में कार्य करने का काफी अफ़सोस और कुड़ महसूस हुवा , और मन ही मन गुस्से में काश मैं अच्छे नोकरी में होता तो इस नक चढ़ी के सामने खड़ा तो नहीं होता , यही सोच दिल में उबाल ले रही , किंतु प्रायवेट जॉब की बेबसी ने गुस्से को चुपचाप पी लेने के सीवा कोई उपाय नही ।
मौन , बेबसी , पर उस नकचढ़ी पर असीमित गुस्सा पर क्या किया जाय।यदि खाली हाथ वापस जॉउंगा तो मालिक की डांट ।
लगभग चार बजे तक कोई प्रतिक्रिया नहीं ।
कि उनके बाजु के कॉउंटर की सहकर्मी महिला ने हमे अंदर बुलाया और ,अरे आप काफी देर से खड़े है क्या चाहिए , हंमने कम्पनी के नाम बता स्टेटमेंट की बात कही।
अरे वो तो मैंने कल ही बना दी थी ये लीजिये , आपका नाम क्या है,
उस कम्पनी में क्या करते है, कहाँ के रहने वाले है।
और कौन कौन है आपके घर?
इतने सवाल ? जवाब देते देते परेशान ये आज क्या हो रहा।
उन्होंने बैंक स्टेटमेंट हमे दे बहुत बड़ा उपकार कर दिए हंमने धन्यवाद दिए , तो उन्होंने कहा आपको हमेशा स्टेटमेंट की जरुरत पड़ती है आप एक काम कीजियेगा ये बैंक लेजर इस रैंक में रखते है माह अनुसार आप स्वयं निकालकर नॉट कर लिया करें। हम कैसे नोट करेंगे मेडम कुछ नहीं बोलेंगी? हंमने सुमि की ओर इशारा किये।
अरे सुमि ,,, वो आपको कुछ नहीं कहेगी ,।
हम आज चलो काम होगया भगवान को धन्यवाद दिए।
अब हम बैंक जाते , पहले सुमि के कॉउंटर के पास खड़े हो जायजा लेते फिर,,, , लेजर बुक निकाल नकल करते।
बिना कुछ बोले कहे चले अपने ऑफिस
, ये सिलसिला लगभग 3 माह तक चला ,कभी कैंटीन आते जाते नजरे मिलती पर ,मौन के सीवा कुछ नही, पर अब वो नकचढ़ी सुमि मुस्कान के आदान प्रदान तक पहुँच चुकी थी।
कि एक दिन हम कैंटीन पहुंचे ही थे , की सुमि अपने सहकर्मियों के साथ हमारे ही टेबिल के पास पहुँच ,, आज अकेले नहीं हम सबको नाश्ता कराना होगा ?
जन्म दिन की शुभकामना,
हैप्पी बर्थ डे नवीन
आज तो मिठाई खायंगे हम?
अरे इन्हें कैसे मालूम मेरा जन्मदिन
हंमने धन्यवाद कह , ठीक है मीठा खा लीजिये बैरे को बुला ऑर्डर देने का उपक्रम पर सुमि की सहकर्मी ने नहीं नवीन जी आज तो ऑर्डर सुमि देगी हाँ पेमेंट आपको ही करना होगा?
हंमने सहमति दे दी ।
उस दिन काफी निकट से सुमि को देखना , बात चित में अटकना, और उनके साथियों का बात बात पर चुटकीयन,
फिर तो माह दो माह में इस प्रकार नाश्ते के मौके आते रहते , सुमि हमेशा नाश्ते का पेमेंट करने को उत्सुक रहती हम विनम्रता से मना कर देते ।
हमारे विवाह सम्बन्धी विचार पूछे , हंमने कह दिया विवाह के बारे में हम जब तक सरकारी नोकरी नही लगेगी तब तक हम विवाह नहीं करेंगे।
और भी चर्चा होते रहती अब हम काफी अच्छे मित्र बन चुके थे एक दूसरे को बहुत सी बात शेयर करते थे ।
एक दिन सुमि का बड़ा भाई हंमसे मिलने सीधे फैक्ट्री आये , विवाह पर चर्चा किये हंमने अपनी समस्या बतलाई
उन्होंने दहेज़ में काफी बड़े रकम की पेशकश के साथ सुमि के बैंक सर्विस की बात पर क्या जरूरत आपको नोकरी की सुमि तो सक्षम है।
हंमने दहेज़ के प्रति अनासक्त दर्शाते एक बात कही , जो अपने पत्नी को अपने कमाई से नहीं खिला सकता उसे मैं इंसान ही नहीं समझता।और मैं जब सक्षम हो जॉउंगा तब तक यदि सुमि की शादी कही न हुई तो
मैं जरूर करँगा।
सुमि काफी नाराज हुयी, अन्य बैंक सहकर्मियों ने हमे समझाया हम टस से मस न हुवे।
अंत में लगभग 3 साल बाद सुमि विवाह कर कोलकोता चली गयी।
शादी में हम किसी कारणवश सम्मिलित न हो सके,पर एक दिन
सुमि अपने पति के साथ हंमसे मिलने आई उनके पति के सामने हम जरा असहज महसूस कर रहे थे , सुमि से भी बात करने में अटपटा सा महसूस और आत्म ग्लानि आ रहा था।
सुमि के पति ने हंमसे काफी मिलनसारिता से बात करते अरे नवीन जी हम सब कुछ जानते है यार। तुम जैसे दोस्त कहाँ मिलते ।
सुमि आज भी तुम्हे नहीं भूल पायी।
पर तुम्हारा दृढ विध्वास अपने कमाई पर खिलाना पत्नी को हम आपके कायल है। आज भी तुम शादी नहीं किये।
अब तो काफी उम्र हो रही 28 साल के हो चले आप? हमारे साथ कोलकोता चलो आपको हम मैनेजर बन देंगे , पेमेंट भी चार अंको में।
हंमने शुक्रिया कह , मना करते हुए , अच्छे समय को याद किया।
आज इस दुनिया में वे नहीं , असामयिक दुर्घटना ने सुमि व उनके पति को हंमसे दुर् कर दिया।
पर दिल के अनन्त गहराई में , सुमि का वह चेहरा और डबडबायी हुयी आँखे ?
,
नवीन कुमार तिवारी

         

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