गरिब बच्चे

*गरीब बच्चों के सपने*
अरे टिल्लू इधर आ?
कब से बोला तेरेको चाय कप धोकर , 12 नम्बर को समोसा दे आ?
और तू हैं कि वही मटरगश्ती कर रहा ?
अच्छा तू फिर पुस्तक पकड़ लिया।
रुक तेरा मस्ती निकलता हूँ, ग्राहकी के समय पढ़ाई?
अरे काका न मारो, मैं तो बस दो पन्ने ही देख रहा था, कल परीक्षा जो देना है, बाकी सब याद है, अभी गुरु जी ने बताया ये सवाल महत्वपूर्ण है कल के लिए , बस।
बड़ा आया तू सवाल करने वाला
यहाँ इतने पढ़े लिखे बेरोजगार घूम रहे तू कलेक्टर बनेगा?
चल ? गंदी नाली के कीड़े काम कर ? , , नहीं तो मैं दूसरे को रख लूंगा। बहुत मिलते यहाँ काम मांगने ।
नहीं ,काका मैं आपका काम कर देता हूँ बस कल के परीक्षा तक ये सवाल का जवाब देखने दो।
इस घटना को शायद सर्वेश होटल वाला भूल चुका था , पर आज उसके सामने एक सरकारी जीप आकर रुकी , और उसमे से एक नोजवान अफसर उसके सामने आकर और सर्वेश काका कितने बच्चो को अपने होटल में काम करवा रहे?
ये कौन ?
आवाज तो शायद पहचानी हुयी लग रही।
चलो अब बच्चो से काम लेना बंद किये की नहीं।
अ अ आ प कौन साहेब
मै तो कोई छोटे बच्चे को होटल में नहीं रखता ?
वो जो पानी दे रहा वह तो मेरा भतीजा है, घर में ख़ाली रहता तो मेरा हाथ बटाता है।
अच्छा एक और टिल्लू
कौन टिल्लू यहाँ कोई टिल्लू नहीं
ये तो भोला है।
अच्छा , अच्छा वो टिल्लू तो कबका भाग गया साहेब।
अच्छा, वो भगा या तुमने उसे परीक्षा देने से रोकने , मार के भगाया था।
नहीं, नहीं साहेब
मैं तो उसे,,
????
मैं ही वो टिल्लू हूँ
चलो अब झूट मत बोलो
चलो भोला तुम्हे यहाँ नःसमाज कल्याण विभाग के बाल कल्याण आश्रम में अब रहना है।
वहीँ तुम रहना और पढ़ाई भी करना
अच्छा काका , मैं वही टिल्लू हूँ जिसे आपने मार कर भगाया था।
वो तो मुझे एक भले अधिकारी ने परीक्षा केंद्र पहुंचाकर परीक्षा दिलवाने में मदद की फिर?
आज मैं बाल कल्याण अधिकारी बन गया ।
नवीन कुमार तिवारी,,,,,

         

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