सम्मान

बाहरवीं कक्षा अच्छे नम्बरों से पास कर अब आगे की पढ़ाई के लिये शहर में जाना था ,तय हुवा की जयपुर जाकर अपनी आगे की पढ़ाई की जाए । जयपुर जाकर नरेन ने बी.सी. ए में प्रवेश ले लिया और अपनी पढ़ाई शुरू की वैसे बचपन से ही उसे आर्मी में जाने का जुनून था ।वहाँ जाकर उसने पढ़ाई के साथ साथ एस. एस. बी. की तैयारी में भी जुट गया। अन्य कोई शौक नही था छः फुट की लंबाई और अच्छी डीलडौल वाला रंग बिलकुल साफ और हँसमुख स्वभाव का नेकदिल लड़का है। शाम को नरेन ने जयपुर घूमने का प्लान किया तो वो सबसे पहले अमर जवान ज्योति देखने गया । वहाँ जाने पर उसने देखा वहाँ गार्ड तो है पर वो चुपचाप बैठे हैं ,लोग आ रहे है जा रहे है वो उन्हें देख तो रहे पर चुप कुछ नही बोल रहे । नरेन ने वहाँ पहुँच कर अपने जूते उतारे और फिर वो अंदर गया ,वहाँ जाकर उसने अपनी आंखें बंद की और उन शहीद अमर जवानों को मन ही मन श्रदांजलि अर्पण की उन जवानों का शुक्रिया अदा किया कि इन्होंने हम आम जनता को बचाने के लिये अपने प्राण न्यौछावर कर दिये। उसकी आँखों की कोर से आंसू निकल गए। ये सब वो गार्ड वहाँ बैठे बैठे देख रहे थे गार्ड ने कहा बेटा आपके मन मे इतनी इज्जत है इस जगह की तब नरेन ने कहा आप तो स्वयं आर्मी रिटायर्ड हो आप तो जान सकते हो कि कितना सघर्ष किया होगा इन जवानों ने तभी तो ये अमर हैं ।गार्ड बोला सच कहा आपने ,नरेन प्रणाम कर वापस आने लगा तो उसने देखा सब लोग जूते चप्पल सहित ही अंदर मशाल जलती है वहाँ तक जा रहे थे, यह बात नरेन को अच्छी नही लगी तो उसने जाकर गार्ड से कहा”गार्ड साब सब लोग जूते लेकर आ रहे हैं पर आप मना क्यों नही कर रहे “तब गार्ड बोला” बेटा यहाँ तो ये रोज का काम है कोई मानता ही नही” नरेन हॉस्टल आकर यही सोच रहा था कि ऐसा क्या करूँ कि लोग सम्मान करें उस स्मारक का और फिर उसने प्रशासन को एक लेटर लिखा ताकि वहां मशाल तक लोग जूते चप्पल लेकर न जाये ।नियम तो पहले भी था पर लोगो को कैसे जागरूक करे वो फिर गार्ड के पास गया और उनसे कहा कि आप थोड़े सख्ती से इस नियम का पालन करवाये ताकि लोग जूते चप्पल उतार कर अंदर जाए ,गार्ड ने भी कहा सही है अब ऐसा ही होगा प्रशासन से भी अनुमति मिल गई । एक छोटे से प्रयास से उन शहीदों के प्रति लोगो के मन मे सम्मान जागृत होने लगा आज नरेन केप्टन बन गया ।जब जयपुर आया तो अमर जवान ज्योति गया उसने पहले की तरह जूते उतारे फिर जाकर नमन कर सेल्यूट किया ।वापस आया तो गार्ड ने गले लगाया और कहा आप तो कैप्टन साब बन गए और फिर सेल्यूट किया तो नरेन ने उनसे कहा आप तो मुझसे बड़े हो और सेल्यूट वर्दी को मिलता हैं मैं इस समय वर्दी में नही हु आप तो मुझे आशीर्वाद दे। गार्ड इतना खुश हुवा कि उसके मुँह से नरेन के लिये ढेरों आशीर्वाद निकल रहे थे ।
(अंजली धाभाई)

         

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