उस आदमी के लिए

मैंने नीलम(पड़ोसन) से कहा, “करवाचौथ आने वाला है क्या कर रही हो ?”

“कुछ खास नहीं ?” उसने रूखे स्वर में कहा।

“क्यों व्रत नहीं रख रही क्या ?” मैंने कहा।

“किसके लिए व्रत रखूँ, उस आदमी के लिए जो इतने सालों से मुझे परेशान कर रहा है, शराब पीता है मारता पीटता है, जो हर वक्त पराई औरतों के साथ रहता है, उस आदमी के लिए व्रत रखूँ, जो न मेरी इज़्ज़त करता है, ना अपने माँ-बाप की इज़्ज़त करता है। जिसे अपने बच्चों की फ़िक्र नहीं। मैं उस आदमी के लिए व्रत रखूँ, उसकी लम्बी उम्र की कामना करूँ ताकि वो मुझे परेशान करता रहे। मैं उस आदमी के लिये व्रत रखूँ ?”

कहकर चली गयी मगर मेरे कानों में अभी तक वो शब्द गूंज रहे हैं, उस आदमी के लिए !

स्वरचित
-कल्पना’खूबसूरत ख़याल’

         

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