उड़ान

नन्ही कोयल कही भटक गई थी ,तो उसे बेतहासा परेशान देख एक कौवी को अपने साथ ले आई .उसने नन्ही कोयल को कौवी ने बड़े प्यार से पाला था।कब कोयल को उसके माता-पिता ने कौवी के घोंसले मेंदेख लिया था , कौवी को पता ही नहीं चला।रंग-रूप तो कौवे जैसा था पर मीठी आवाज विरासत में मिली थी।पूरा परिवार उसे बहुत प्यार करता था।पर अब उसे कौवे की कांव-कांव कहां पसन्द थी?उसे तो मीठी कुहू ही सुनानी थी . सब कौवे कांव-कांव करते ,वो बच्चा दूर बैठ गहरे दर्द भरे गान गा माँ को बुलाता फिर उसके भी पंख जो आ गये थे, एक दिन देखा कही आमो के बाग में उडारी लगा गया था .कौवा -कौवी तलाशते रहे फिर बाग में देखा सोचाऔर कहने लगे ,’ ये जीवन भी कोर कागज है ,कब कोई मतलब के बाद सगा हुआ है ,जमाने की यही रीत और नियत है.रेखा मोहन १९/५ /२०१८

         

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