आत्मग्लानि

अचानक से आँख खुल गयी ….पसीना पसीना हो उठी मै ,कानों में तेज के स्वर गूंज रहे थे , “”क्यों नही मेरे होठों से अपने होठ मिलाये …क्यों नही अपनी साँसों का जाल फेंक कर मेरी साँसों को लिवा लायी तुम….क्यों इस तरह चले जाने दिया मुझे ….अभी तो मैं ओर जीना चाहता था !! “”
पसीना पोंछ कर मोबाईल में वक्त देखा तो रात के दो बज रहे थे । राज जो कि बगल में सोए थे उन्हें देखा तो वो गहरी नींद में थे ! मेरी नींद कोसो दूर जा चुकी थी उठकर हौले से बैडरूम का गेट खोलकर बाहर बालकनी में आ खड़ी हुई । ठन्डी हवा संग अतीत भी एक बार फिर मेरे सामने से चलचित्र की भांति गुजरने लगा ,
जब ब्याह कर इस घर में आयी तो भरेपूरे संयुक्त परिवार में हमउम्र साथी के रूप में मुझे तेज मिला ,चुहलबाजियाँ करता तो बहुत मान भी देता ,मीठी तकरार करता और मेरे रूठने पर धीरे से कहता “”मान भी जाओ भाभी वरना सितारों में ढूंढोगी मुझे “”” और मै हौले से मुस्कुरा कर डाँट देती कि ऐसा नही कहते !!
समय बीतता गया और तेज के लिए एक सुंदर सी कन्या (अनु ) तलाश कर नियत तिथि पर बहुत धूमधाम से तेज की शादी अनु से कर दी गयी । वक्त बीतने के साथ वह एक प्यारे से बेटे का पिता भी बन गया !
एक रात बारह बजे अचानक मेरी देवरानी अनु ने जोर से बैडरूम का गेट बजाया और बोली “”भाभी , जल्दी बाहर आओ ,तेज को पता नही क्या हुआ है ,उनको साँस नही आ रही “”मै उसके बैडरूम की ओर दौड़ पड़ी ,मेरे पीछे पीछे राज भी दौड़ कर आये ,देखा कि तेज मुँह के बल जमीन पर गिरा था पसीना पसीना हो रहा था साँसे उखड़ रही थी ! बड़े भैया ,भाभी,माँ, बाबूजी सब इकट्ठा हो गये ,राज डाक्टर को फोन करने लगे । मैनें बड़े भैया से कहा “”इन्हे मुँह से साँस दीजिये “”…पर वो रोने लगे और साँस ठीक से नही दे पाये !
और मै अपनी स्त्री सुलभ शंका से सकुचा कर उसकी साँसों से अपनी साँस नही मिला पायी और देखते ही देखते मेरे ही हाथों में वो हम सबसे मुंह मोड़कर चला गया और मुझे दे गया जिन्दगी भर की आत्मग्लानी !! काश …मैने उसकी उखड़ती साँसो में अपनी साँस मिला दी होती तो शायद वो हमारे साथ होता ,उसकी अधखुली आँखे ,आज भी मुझसे एक ही सवाल करती है तुमने ऐसा क्यों नही किया …..क्यों नही मुझे बचाया , भाभी !!!

★वन्दना ★

         

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