ऐ दिल! सँभल

।। ऐ दिल! सँभल ।।
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आज घर में पार्टी थी।अनुपम आज सर्जन बन गया था।दिल का डॉक्टर और अगले ही माह उसके दिल की रानी भी घर की रानी बनने वाली थी।डॉक्टर ईशा से वह पिछले सात वर्षों से परिचित था और दोनों ने सात वर्षों का लंबा इंतजार भी तो किया था।
जब एक वर्ष हुआ दोनों के विवाह को,तब पार्टी में उनके साथ उनका एक माह का पुत्र विरीश भी था।संयुक्तता ,धन-वैभव, संपन्नता प्यार सब कुछ ही तो था,अनुपम के परिवार में।
अनुपम आज बहुत चिंतित था।परसों उसके बेटे का पहला जन्म दिवस है और विरीश के दादा-दादी ने लगभग आधे शहर को इस जन्मोत्सव के लिए आमंत्रित किया था।अनुपम अचानक से चाय पीते समय मूर्छित होकर गिर गया था।ईशा दौड़ती आयी थी क्लीनिक से।मगर तब तक तीस वर्षीय अनुपम जा चुका था।
तेरहवीं के बाद,ईशा को एक ईमेल के ज़रिए मालूम हुआ कि अनुपम घर की छत के अलावा सब कुछ ही शेयर बाज़ार में हार गया था।
हृदय रोग विशेषज्ञ, हृदय आघात से लालच का ग्रास बन गया था।

शुचि ‘भवि’
20.03.18
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