गौ हत्या

मोहल्ले में सन्नाटा सा पसरा था। सब लोग अपने घरों में दुबके थे। पुलिस घर घर जा कर पूछताछ कर रही थी पर कोई बताने को तैयार ही नही था कि पीपल के पेड़ के नीचे बहुत बुरी हालत में मरी पड़ी गाय की हत्या आखिर किसने की ।
मीडिया वालों ने इस घटना को इतना बढ़ा चढ़ा कर प्रसारित किया कि शहर में कई जगह साम्प्रदायिक दंगे होने लगे। ऊपर से मुजरिम को जल्द से जल्द पकड़ने का दबाव ,दरोगा बाबू पर जोर पकड़ने लगा।उन्हें सख्त निर्देश मिले की तीन दिन के भीतर किसी भी हाल में मुजरिम पकड़ा जाए , पर कोई सुराग नही मिल पा रहा था। मोहल्ले वालों ने इस मामले में मानों अपना मुँह ही सिल लिया था।
असहाय होकर दरोगा बाबू ने एक युक्ति निकाली और मोहल्ले में एलान कराया कि जो बेसहारा गायें किसी के भी खेत खलिहान में घुस कर अपनी भूख शान्त करने के प्रयास में मारी जाती है उनके लिए एक गौशाला का निर्माण कराया जाएगा ,तो जब तक गौहत्या का मुजरिम नही पकड़ा जाता, प्रत्येक घर से हर सप्ताह चंदे के रूप में 200 रुपये बसूले जाएंगे ।
तीसरे ही दिन मोहल्ले की महिलाओं का आक्रोश फूट पड़ा और वे सब इकट्ठा हो कर होकर दरोगा जी के पास गई और बोली पार्षद जी के बेटे की करनी का दण्ड हम क्यों भुगते ।
और कुछ ही देर में पुलिस स्थानीय पार्षद के बेटे को जीप में बिठा कर ले गयी ।

★वन्दना★

         

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