तबियत

श्यामा प्रसाद पिछले तीन दिन से अपने बेटे कह रहे थे कि बेटा तुम्हारी बुआ की तबीयत ज्यादा खराब है मुझे उनसे मिला कर लाओ पर शेखर हर बार कह कर टाल देता कि ‘अभी टाइम कहाँ है पापा,,, आपको तो पता ही है न मार्च का एंडिंग चल रहा है ,मुझे तो ऑफिस में सिर उठाने तक की फुर्सत नहीं ।
तो बेटा मुझे गाड़ी में ड्राइवर के साथ भेज दो ।
अरे नहीं पापा ! गाड़ी कहां से भेजूँगा ,हेडऑफिस के कितने चक्कर काटने पड़ते हैं मुझे ,गाड़ी के बिना कैसे काम चलेगा ।
तो बेटा ,अवनी को मेरे साथ भेज दो , मैं उसके साथ कैब से जाकर शाम तक लौट आऊँगा ।
तुम तो जानते हो न आँखों से कम दिखाई देने की वजह से मैं अकेला नही जा सकता ।
नहीं पापा ! आपको तो पता ही है विदित की एग्जाम चल रही है वह भी फाइनल एग्जाम !!
अवनि घर का काम करेगी ,,, विदित को पढ़ाएगी ,,,वह चली जाएगी तो सब कुछ डिस्टर्ब नहीं हो जाएगा ? आप समझो पापा !! 4 दिन बाद सन्डे है मैं तब आपको मिला लाऊंगा ।
सुबह अलसवेरे गाड़ी स्टार्ट होने की आवाज सुनकर श्यामा प्रसाद बाहर आये तो विदित ने बताया कि उसके मामा की जुकाम की वजह से तबियत खराब होने के कारण मम्मी -पापा उनका हालचाल पूछने गए हैं ,,शाम तक लौट आएंगे ।

         

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