तोहफा

  • नमन जी😊 अलका को बहुत इंतज़ार था सुमित के लौट आने का। सुमित कहकर गया था कि उसे आज एक तोहफा दूंगा। उसका इंतजार कट नहीं रहा था, बार बार घड़ी देखती थी। अलका बार बार सोचती क्या लाएंगे। और खुद ही कभी शर्माती, कभी खुश होती तो कभी नाचने लगती, काफी महीने गुज़र चुके थे दोनो को बात भी किये हुए, और आज सुबह सुबह जब सुमित ख़ुद उसके पास आया और बोला, शाम को तुम्हारे लिए तोहफा लाऊंगा, तो अलका को लगा, जो भी दूरियां उन दोनो के बीच आई थी, वो अब खत्म हो जाएंगी। और वो फिर से सुमित का प्यार पा सकेगी। शादी की कुछ महीनों बाद ही छोटी छोटी बातों को लेकर दोनो में खूब झगड़े होते थे, वास्तव में दोनो बिल्कुल डिफरेंट थे, जहाँ सुमित की सोच पूरी तरह आधुनिक थी, वहीं अलका पूरी तरह सेपुने ज़माने की भारतीय महिला,जिसके लिए,सिंदूर, चूड़ी, पति, सुहाग बहुत मायने रखता था। सुमित को समस्या नहीं थी, पर वो चाहता था कि अलका थोड़ी सी आज के ज़माने की औरतों जैसी हो। और अलका ये सब समझकर भी न समझना चाहती थी। बस इसी को लेकर झगड़े होते थे। अलका सोच रही थी,उसने सोचा जब सुमित ये चाहते हैं कि वो थोड़ी सी आज कल की महिलाओं की तरह बने तो क्यों न आज वो वैसी बनकर सुमित को भी तोहफा दे दे। वो घर से निकली ब्यूटी पार्लर गयी, वर्स्टर्न ड्रेस खरीदी और शासम तक एक उसके साथ काम करने वाली लड़कियों की बन गयी, और इस बात का खयाल रखा की उस पर ये सब अटपटा न लगे, न उसके मन को ठेस पहुंचाए। तो अलका का तोहफा अब तैयार था। शाम हो गई सुमित आया। उसके हाथ में एक पैकेट था, और वो बिल्कुल बदला लग रहा था, उसने बिल्कुल पुराने ज़माने की लोगों की तरह कपड़े वेशभूषा पहनी थी, अलका देखकर दंग रह गयी, और उधर सुमित भी अलका को देख दंग रह गया। थोड़ी देर बाद सुमित ने कहा, मुझसे बर्दास्त नहीं हो रही थी ये दूरियां,वो भी तब जब मैं तुमसे प्यार करता हूँ, और तुम्हारे ज़िन्दगी बिताना चाहता हूं , तो सोचा आज से अपने आप को ही तुम्हारे अंदाज़ से बदल लूँ। तुम्हे ये तोहफा पसंद आएगा। और शायद ये दूरियां मिट जाएं। अलका की आंखों में आंसू आ गए। वो बोली,मुझे माफ़ कर दीजिए, वास्तव में गलती हम दोनों की ही है, हमने सामंजस्य न बिठाना सीखा, न ये जान पाए कि एक दूसरे के थोड़ा बदलना ज़रूरी है। तभी रिश्ते खूबसूरत होते है।मैं वादा करती हूं, जितना हो सकेगा, खुद को आप की परिस्तितियों के अनुरूप ढालूंगी। मैं भी आपसे प्यार करती हूं। इतना अपने प्यार के लिए ज़रूर करूंगी। सुमित ने अलका के आँसू पोछे और बोला सिर्फ तुम क्यों मैं भी पूरी कोशिश करूंगा। प्यार तो मैं भी करता हूँ कहकर अलका को गले से लगा लिया। अलका बोली इसमें क्या है, देख लो सुमित मुस्कुरा कर बोला। अलका ने देखा तो उसमें सुहाग का जोड़ा था। सुमित बोला चलो, आज फिर से जिंदगी की नई शुरुआत करते हैं। यूँ समझेंगे की आज ही हमारी शादी हुई है। अलका ने सुना तो शर्म से सुमित के सीने में सर छुपा लिया। आज वाकई दोनो ने दोनो को जिंदगी खुशहाल बनाने का तोहफा दिया था। ©सखी
         

Share: