न्याय

जगन की मेहरारू सुगना की खूबसूरती के चर्चे पूरे गाँव मे फैले थे । तीन बच्चों की माँ होने के बावजूद भी उसकी सुन्दरता जस की तस थी । साहूकार की नजर काफी दिनों से थी उस पर । वह बहुत कोशिश कर चुका था सुगना को अपने जाल में फाँसने की । ये बात सारे गाँव को भी पता थी ।एक दो बार थाने में साहूकार की शिकायत करने जगन गया भी था पर थानेदार ने उसे डाँट कर भाग दिया ।
एक दिन अलसवेरे खेतों में जाते वक्त अचानक सुगना का अपहरण हो गया । जगन अकेला और अपहरणकर्ता चार ! वो बेचारा कुछ नही कर पाया और दौड़ा दौड़ा थाने में गया । वहाँ थानेदार साहब को सारी बात बताई । सारी बात सुनकर थानेदार को ये तो समझ आ गया था कि ये हरकत साहूकार ने ही की है पर उसके रसूख और दबदबे को ध्यान में रखते हुए जगन को झूठी तसल्ली दे कर घर भेज दिया ।

जगन की मेहरारू का अपहरण हुए आज तीन दिन हो गए । थानेदार साहब खोजबीन भी नही करवा रहे । थकहार कर गाँव वालों की सलाह से आखिर जगन ने मुख्यमंत्री महोदय के पास गुहार लगाई । चुँकि मामला सोशल मीडिया की नजरों में भी आ चुका था और पुलिस डिपार्टमेन्ट पर दबाव बढ़ रहा था तो एस पी महोदय ने एक युक्ति निकाली और थानेदार को आदेश दिया ,”जब तक जगन की मेहरारू को ढूंढ कर नही लाते तब तक उसके तीनों बच्चों को अपने घर पर रखो ,,उनकी देख भाल करो और जगन के लिए दोनों समय का खाना उसके घर पहुंचाओ “। चूँकि आदेश में सभी आला अफसरों की स्वीकृति शामिल थी तो पालना तो होनी ही थी । आदेश पारित होने के दूसरे ही दिन सुगना सही सलामत पुलिस द्वारा ढूंढ ली गयी और साहूकार जेल के सींखचों के पीछे था।

★वन्दना★

         

Share: