पुलकित

सुनो –
रोमा :- ” जी ”
साड़ी का पल्लू खोंसे रोमा एक हाथ से अपने
बिखरे बालों को सही करते हुए अपने पति को देखती है
और फिर चादर ठीक करने लगती है
रमेश कहते है

रोमा थोड़ा आराम से बैठ लो सुबह से भाग रही हो

पुलकित सी
रोमा एकटक रमेश को देखती है
इतने में

बहु ऊऊऊऊऊऊऊ ००००

” जी आई इईईईईईईईई ”

कहती हुई रोमा नई ऊर्जा के साथ अगले कमरे में
सास की आवाज़ पर भागती चली गयी
♦️
मनु

         

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