बंधन

बंधन मुक्त
रमेश घर आते ही पिंजरे में बंद तोते को आजाद कर दिया । तोता शायद धन्यवाद बोलता हुआ पिंजरे के चक्कर लगा उन्मुक्त नील गगन में ओझल हो गया। रमेश के आँखे भावावेश में डबडबा गयी।
अरे ये परिवर्तन आज मम्मी ने उससे पूछा ,,,,,,,,क्या हुआ ?
तुमने तोता को उड़ा दिया ,अब फिर नये तोते जे लिये कहोगे?
नहीं मम्मी अब मैं समझ गया बंधन का दर्द ,
आज शाला से अपने स्कूटी से जब घर आ रहाथा तो ट्रैफिक पुलिस ने हम सभी स्कूटी चलानेवाले बच्चो को लाइसेंस नहीं होने पर थाने में बिठा कर इ घंटे तक रोक लिए, और कोई पुलिस वाला कहानी सुना रहा, तो कोई गाना सुनाने की जिद्द।
वो तीन घंटे ?
बंधन के ।
बस आजादी ,और बंधन मुझे भी संमझ आ गया।
अब इस पिंजड़े में खिलौने का तोता रखूँगा पर जीवित खुले ही रहेंगे ।
नवीन कुमार तिवारी

         

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