फेसबुक फ्रैंड

ऑफिस से थकिहारी निर्मला जैसे ही घर में घुसी तो देखा उसका बेटा साहिल मोबाईल से चिपका हुआ है ।
सारा घर अस्त व्यस्त …..कही कपड़े बिखरे पड़े है तो कहीं जूते चप्पल फैले पड़े है । मेज पर चाय के जूठे कप ओर नाश्ते की प्लेट पड़ी है ।
साहिल ने उचटती सी नजर माँ पे डाली और फिर से मोबाईल में कुछ टाइप करने लगा । ये देख निर्मला का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुँचा !
‘ सारा दिन मोबाईल में घुसे रहते हो , ये नही की माँ थकीहारी ऑफिस से आएगी ,थोड़ा घर सही कर दूँ ,धर्मशाला बना के रखा है घर को ,सारा दिन फेसबुक पर लगे रहते हो ।’
ओह्हो माँ , चैटिंग ही तो कर रहा हूँ कौनसा अपराध कर रहा हूँ !! जानती हूँ ,पर ये तुम्हारे फेसबुक फ्रेंड कभी काम नही आने वाले । वक्त पड़ने पर 5000 की लिस्ट में कोई एक ऐसा नही है जो मुसीबत में तुम्हारे काम आएगा ,पर्सनली जानते तो हो क्या इनमें से किसी को !!
निर्मला बड़बड़ा ही रही थी कि माँ का फोन आ गया लखनऊ से ,वो घबराई हुई सी बोली ,बेटा तुम्हारे पापा की तबियत ठीक नही हो सके तो एक बार आ जा ,कहकर फोन काट दिया ,इकलौती बेटी होने के कारण निर्मला को लगा अभी जाना चाहिए । घडी में देखा तो सात बज रहे थे सोचा दस बजे वाली ट्रेन मिल जाये तो बीकानेर से लखनऊ कल शाम तक तो वो पहुँच ही जायेगी !सोचते हुए रसोई की और बढ़ गयी,जल्दी जल्दी दोनों का खाना बनाया ,फुर्ती से दो तीन जोड़ी कपड़े बैग में डाले ,बॉस को तीन दिन की छुट्टी के लिए फोन किया ओर साहिल को साथ ले कर रेल्वे स्टेशन के लिए निकल गयी । सारे रास्ते उसे हिदायत देती रही कि सारा दिन फेसबुक में खराब मत करना ,पढ़ाई पर ध्यान देना ।
ट्रेन अपने सही समय पर थी और तत्काल में रिजर्वेशन भी मिल गया ,ट्रेन में बैठने के बाद साहिल को भी वापस भेज दिया और खाना खाकर सोने की तैयारी करने लगी ,सोते ही आँख लग गयी ।सुबह साढ़े छह बजे करीब आँख खुली,सहयात्री से पूछने पर पता चला दिल्ली आने वाला है।सोचा चाय ले लूं , पैसे निकालने के लिए बैग सम्भाला तो जी धक्क से रह गया ,जल्दी से बैग के सारे कपड़े निकाल कर देखा कि शायद अंदर कहीं दब गया हो सीट के ऊपर नीचे चारो तरफ टटोला पर पर्स नही मिला , मैंने तो बैग में सबसे ऊपर ही रखा था ,निर्मल ने मन ही मन सोचा पर जब चारों तरफ तलाशने पर भी नही मिला तो भरोसा हो गया कि पर्स चोरी हो गया । उसके अंदर ही मोबाईल भी था । निर्मला बहुत परेशान हो गयी की अब क्या करे !
इतने में ही …..नमस्ते आंटी,,आप साहिल की मम्मी है ना ? मै कबीर हूँ, उसका फेसबुक फ्रेंड ,आपका फोन स्विच ऑफ आ रहा था तो साहिल ने कहा आपको संभाल लूँ , कोई प्रॉब्लम तो नही है आपको ,कहते हुए उसने दो पैकेट दिए ,एक में गर्म पोहे थे दूसरे में थर्मस ,जिसमे गरमा गरम चाय थी ,इतने में ही साहिल का फोन आ गया तो कबीर ने निर्मला को फोन दे दिया !
साहिल ,मेरा पर्स और मोबाईल चोरी हो गए बेटा …..निर्मला और कुछ कहती तब तक ट्रेन सरकने लगी तो उसने जल्दी से फोन कबीर को दिया और थैंक्यू कहा, वो जल्दी से ट्रेन से उतर गया !
चाय नाश्ता करते हुए निर्मला को साहिल पर बहुत प्यार आया ,सोचने लगी उसको कितना डाँटती है पर आज उसका फेसबुक फ्रेंड ही काम आया पर साथ ही चिंता भी हो रही थी कि बिना पैसे घर कैसे पहुँचेगी ।
दोपहर के एक बजने वाले
थे ट्रेन बरेली स्टेशन पर पहुँच गयी तभी एक लड़की उसे तलाशते हुए पहुँची….. नमस्ते आँटी,, आप साहिल की मम्मी है ना ? मै उसकी फेसबुक फ्रेंड स्मिता हूँ!उसने मुझे आपके बारे में बताया ..कहते हुए उसने निर्मला को एक खाने का पैकेट और दो हजार रुपये दिए जिसमे कुछ छुट्टे भी
थे ।उसने कहा ‘साहिल ने उसके अकाउंट में दो हजार रूपये ट्रांसफर करवा दिए थे ‘ और वो मुस्कुराते हुए बाय बोलकर चली गयी, निर्मला अवाक् सी उसे जाते हुए देख रही थी ।
अचानक ही उसे ये फेसबुकिया दुनियाँ अच्छी लगने लगी ,वो सोच रही थी कि अब तक उसने फेसबुक के नकारात्मक पहलू को ही देखा,सकारात्मक पहलू पर कभी गौर ही नही किया । सच में,वास्तविक जिंदगी की भाँति यहाँ भी तो अच्छे और बुरे ,दोनों तरह के लोग है ,बस चुनाव में सावधानी की जरुरत है ।
अगर आज साहिल के ये फेसबुक फ्रेंड नही होते तो सफर इतना आसान नही होता । मन ही मन सोच रही थी जाते ही साहिल से कहूँगी की फेसबुक पर मेरा भी अकाउंट बना दे ,मुझे भी कुछ ऐसे ही प्यारे दोस्तों की जरुरत है ।

##वंदना

         

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