अंबर मन

तन्हा रातें तन्हा दिन ।
घुटती रातें लुटता दिन ।
सावन भी भींग रहा है ।
साजन देखो तुम बिन ।

आ भी जाओ बाहों में ,
गुजरें अब यादों के दिन ।
नर्म पड़ीं है ठंडी साँसे ,
आँखे नम है तुम बिन ।

रीत रहा है अंबर मन ,
बूंदों सा पल पल छिन ।
दूर राहो न एक पल को ,
थकतीं पलकें पल को गिन ।

तन्हा रातें तन्हा दिन ।
घुटती रातें लुटता दिन ।

… विवेक दुबे”निश्चल”@..

         

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