अक्स

परछाई…..।
स्नेहिल हो सजल नयनों से है कोटि-कोटि आभार व्यक्त।
संग मेरे रहती ये सदा अदृश्य होकर,हर पल और हर वक्त।
साथ नहीं देता जीवन में हर पल कोई भी शख्स
रहता साथ जो बिना जताए,एकमात्र अपना अक्स

हूं हृदय से आभारी मैं उसकी
वो साथ मेरे चहूं ओर है।
वही करती होंसला अफजाई
हां, मेरी पुरजोर है।
छाया अक्स प्रतिबिंब बन चलती
वह मेरी परछाई।
अटूट विश्वास बंधन लगाव की
इसने वर्षा बरसाई।

रहती सदा साथ मेरे कभी
अहसान भी जतलाती नहीं।
निर्मल अमल सुधा सी है यह
इसे चाहिए कोई ख्याति नहीं।

प्रकाश तज चुना तम इसने
मेरे ख्यालों को बुना है इसने।
मेरे हर्ष में संग उल्लास मनाया
मेरे दुखों में किया संग विलाप इसने।

जीवन की हर उथल-पुथल को
यह साथ मेरे है मथ रही।
नहीं मुमकिन शब्दों में कहना
है वेदना इसने अकथ सही।
है हर परिस्थिति में साथ दिया
है हर विपदा साथ उठाई।
नहीं रहता कोई साथ नीलम
साथ रहती बस परछाई।

नीलम शर्मा

         

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