अवर्णित काव्य

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मेरे अधर राग के
मालकौंस
मन वीण पर तुम
विराजित
!!
मद्दम सुर के आलाप
मुदित नयन
दृग बिंदु पर शोभित
कंचन आनन
स्वरेश्वर सिरमौर तुम
!!
सुप्त श्वास की आस
कंवलित कलि
कुमारिका के कौमार्य
अनघ प्रेयस
रूप सागर हिलोर तुम
!!
हे सुभग श्याम सिंगार
हे “कामायनी” सुकुमार
मितभाषी … मधु हास पर
किस बिध लिखुँ इतिहास
!!
मेरा इतना नहीं सामर्थ्य
करूँ कोई वर्णित काव्य

💫दीप💫

         

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