आस

आज उठी उर पीर अति ,सजल नयन मम होय ।
बीता जीवन है सकल ,तुम्हे बिलख उर रोय ।
छंद रस लय रहित ,लगा रही अरदास ।
मम पूजा अर्चन यही ,दर्श देहु महराज ।।
करौं जो पूजा यजन ,मिल जायेगी सिद्धि ।
रंग रूप रस शब्द की ,पूरण होवै रिद्धि ।
साधन पूजन से मिले ,शबरी को श्रीराम ।
यही कामना मम हृदय ,दुख हो सभी विराम ।
सबका असीम अतीव है ,गिरिधर में विश्वास ।
करती नीलम साधना ,खिले धरा उल्लास ।

नीलम शर्मा

         

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