कविता सावन

कविता सावन
सावन तो आया अरमान है
न्यौता तो पाया अब जाना हैं .
अम्मा आज लगा दे झूला
, इस झूले पर मैं झूलूँगा।
इस पर चढ़कर, ऊपर बढ़कर,
आसमान को मैं छू लूँगा।
झूला झूल रही है डाली,
झूल रहा है पत्ता-पत्ता।
इस झूले पर बड़ा मजा है,
चल उच्चे , ले चल वत्ता।
झूल रही नीचे की धरती,
उड़ चल, उड़ हवा में मस्ती ।
बरस रहा है रिमझिम बुँदे ,
उड़कर मैं हो लूँ चक्षु मूंदे ।
झूला हिले है खुले मैदान में
जीवन झूमे है गाते गान में.
रेखा मोहन २८/७/१८

         

Share: