कहानी के बदलते किरदार

,कहानी में किरदार अलग होता है
या जिंदगी में दोहरावो का कुछ मतलब होता है ,
कहते इतिहास दुहराता है
सो रुलाने की बात याद के बाद फिर रुलाता है ,,
जब भी दिल की मानी है
वही हार की कहानी है
छल कपट मासूम लगी
तब भी हार कहा मानी है
किसी की याद आती है
दिल को इतना सताती है
रंग भरे मौसम को भी
बोझिल बना जाती है
देख रहे उनके ही सितम
जो बोले एक जान है हम
रंग जरा उधड चुका है
कसम जो टूट चूका है
जीवन सवारने के जुगत में
हमेशा दोराहे मिलते है
चारा फेक जाल बिछाए
मासूम बन ठग जाते है
स्वरचित
नवीन कुमार तिवारी

         

Share: