खतरनाक रिश्ते,,,

 

सपना इक क्यों देखा हमने
वो भी जागी आँखों,
धुंधला ही तो देख हैं पाये
वो भी गीली आँखों,,,

रिश्ते न निभाना आया हमको
खतरनाक रहे दोस्तों,
रिश्ता फिर क्यों था बनाया हमसे
वो भी बिन सौगातों,,,,

यादों के वीराने भटक रहे अब
वो भी तपती सड़कों
भविष्य का भी पता नहीं अब
दूर वर्तमान बरसों,,,

शुचि(भवि)

         

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