गुड़िया

एक छोटी सी गुड़िया
खुश हमेशा रहती थी
ममता के आँचल में वह
हमेशा खेला करती थी
थोड़ी सी जब बड़ी हुई
मामा दादा कहना सीखी
अपनी मन चंचल से वह
सबको खुश रखना सीखी
स्कूल जाने की उम्र हुई तो
क ख ग घ कहना सीखी
अपनी ही बातों से वह
सबको वह रिझाना सीखी
गुनाह सिर्फ इतना था कि
लोगो के साथ रहना सीखी
एक दिन नीच व्यक्ति मिला
कोमल मेरे शरीर को
तार तार वह कर डाला
महज छोटी सी उम्र में
मेरी बगिया उजाड़ डाला
पुरे मानव समाज को
कलंकित उसने कर डाला।

रचनाकार- रंजन कुमार प्रसाद (माध्यमिक शिक्षक)
उत्क्रमित हाइस्कूल तोरनी,करगहर,रोहतास
दूरभाष-9931580972, 9473163372
email-ranjangupta9931@gmail.co

         

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