चलती रहती जीवन पर्यन्त

एक डायरी जिंदगी की
अतीत के पन्नों को समेटे
दिल की कागज पर
सहेजे रखा है वर्षों से
जब थक जाता है मन
वर्तमान की चुनौतियों से लड़ते-लड़ते
तब रात की तन्हाईयों में
पलट लेते हैं बीते दोनों के पन्नें
संचित यादों का धरोहर
उसमें जिया हुआ जीवन
अपनों का मजबूत हांथ
जो थामे रखता था कदम दर कदम
वो बचपन जवानी का सफर
भोर की सादगी फूलों सी खिलखिलाती हुई
सपनों की सीढ़ी पर चढ़कर
चांद का पल्लू छूकर आ जाते थे
सूरज से डटकर नजरें मिलाना
तारों को उंगलियों पर गिनना
एक पूरा यादों का स्वर्णिम इतिहास
जी रहा है भीतर
समय बढ़ता है निरन्तर
पर कभी स्याना नहीं होता
पर हमें जरूर परिपक्व और
परिस्थियों के हांथों जूझना लड़ना सीखा देता
जर्द पन्नों में कैद हो जाती
बचपन जवानी के दिन
फिर शुरू होती हम- तुम जिन्दगी संघर्ष
जो चलती रहती जीवन पर्यन्त।

         

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