चाँदी के सुनहरे तारों में

🌹🙏🌹

✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
बहुत मजबूत कलम है…….
टूटेगी नहीं …….
भंडार है शब्दों का …….
पास आ जाते है ….. कोरे ” कागज “…
खुद ब खुद …… बिछ जाते हैं …. कलम के नीचे
… स्याही लेकर चल पड़ती है कलम ….
छाप देती है …” दिल “में बसी तस्वीरों को …
पर ये क्या ???
आज कलम चुप है …. कागज पर रंग भरने से …..
इन्कार है इसका …..ना कोई शब्द….. अफसाना ..
अहसास … दर्द या खुशी …. कुछ भी तो नहीं …
जाने कौन सा तुफान ….. उमड़ रहा है ….. अंधेरे कोने में ….ना दीये की लौ है …. ना चाँदनी मुस्कुरा रही ……
क्यों ये मन है बहका सा …… किसकी मुझको आस है..
सोचा यहां पर क्रमशः लिख दूँ ….. फिर मन में आया कि मुझे क्रमशः ….. लिखना ही पसन्द नहीं …. उसके आगे क्या …… मन सोचने पर मजबुर हो जाता है ….. बढ़ चली आगे…..
कलियां भी तो मौन है ….
काँटें भी कुछ झुके झुके …..
भंवरों का भी शोर नही….
ना पूरवाई की आहट है …..
मुस्कान फूलों की चली गई….
गुलिस्ताँ सारा मौन है ……
कंपन है इन हाथों में ….
ताकत भी नहीं बातों में …
कलम भूल गई शब्दों को ….
होता कोई अहसास नही…
कैसा ये मंजर है …… आहट भी यहां कोई नहीं…
देख आईना बैठ गई………
आस जगी फिर एक नई ……. लिखने फिर मैं बैठ गई…
कलम फिर से चलने लगी…
आस फिर से पलने लगी…
क्षितिज सुनहरा बन गया…..
शब्दों का समन्दर मिल गया….
सागर सी गहराई मिली…..
लहरों सा संगीत मिला ….
तितली देखो बहक रही…..
भंवरों को भी गीत मिला…..
खुशबू फैली बगिया में…..
चाँद को भी चकोर मिला….
ऐसा क्या था आईने में ….
दिल को बहुत सन्तोष मिला… क्योंकि…..
आईना सच बतलाता है …… जो तुम हो बतलाता है ……
चेहरे कि सिलवटों ने…. तजुर्बों को दिखाया था …..
मंजिल अब भी बाकी हैं ….. चाँदी के सुनहरे तारों में…
बालों की कालिख बाकी है…….
कोरे ” कागज ” के पन्ने पर……..
कलम ने ” दिल “का हाल सुनाया है ……
खुले आसमाँ के आँचल से ……
चाँद का नूर चुराया है……

-उर्मिल#चित्कला✍

         

Share: