ठहरा अतीत

आज दिल के एक कोने से आवाज़ आयी
जो कसक दबा रखी थी सालो से
आज जाग आयी
देखा उसे जब मैने सालो बाद
मन में एक बात आयी
काश की तू हिस्सा होता मेरी ज़िन्दगी का
और में होती तेरी परछाई
पर खेल था तकदीरो का
किस्मत की लकीरो का
जुड़ न सकी राहे हमारी
पर तेरे हिस्से में रौशनी
और मेरे हिस्से तन्हाई आयी
आज दिल के कोने से आवाज़ आयी

         

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