तुम बिन

ध्यान में आकर बैठ गए हो
तुम भी ना…
मुझे मुसलसल देख रहे हो
तुम भी ना….

दे जाते हो मुझको कितने रंग नए
जैसे पहली बार मिले हो
तुम भी ना….

हर मंज़र में अब हम दोनों होते हैं
मुझमें ऐसे आन बसे हो
तुम भी ना….

इश्क ने यूँ दोनों को हम आमेज़ किया
अब तो तुम भी कह देते हो
तुम भी ना….

खुद ही कहो अब कैसे संवर सकती हूँ मैं
आईने में तुम होते हो
तुम भी ना….

बन के हँसी इन होंठों पर भी रहते हो
अश्कों में भी तुम बहते हो
तुम भी ना…

मांग रहे हो रुखसत मुझसे और फिर भी
हाथ में हाथ लिए बैठे हो
तुम भी ना ….

         

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