दिल कागज़

दिल मेरा कागज सा,
था कोरे कागज सा।
जो भी जब भी लिखा,
हाँ बस तुमने ही लिखा,
प्यार के कुछ पल सुहाने,
वादों के एहसास पुराने,
दिल के कोरे कागज पर,
थे तेरे मेरे जज़्बात लिखे,
नाम तुम्हारा लिखा हुआ,
तुम्हारे लिए ही खिला हुआ,
कोरे कोरे पन्नो पर फिर,
दर्द रहा है बिखरा हुआ,
छोड़ना पास आना तुमने लिखा,
अब भूल जाना भी तुमने लिखा,
आओगे कभी लौटकर,
ये भी अब तुम ही लिखोगे,
मेरा मन तो कागज़ जैसा,
जिस पर अब भी तेरा नाम लिखा।

©सखी

         

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