मधुर यामिनी

मधुर यामिनी पलकों पे
निंदिया ले के आजा
तारों की चुनरी ओढ़ के
माथे चाँद दिखा जा
थकी हारी मेरी आँखों को
कोई ख्वाब दिखा जा।
पलकों को मेरी भारी कर
अपना जादू दिखा जा
यामिनी के आगोश में सिमट जाऊ
तारों की शीतल रश्मि से लिपट जाऊ
आत्म विस्मृत होकर मै पिघल जाऊ
मेरे कन्ठ पे रुकी वेदना निगल जाऊ
यामिनी में है भरी खामोशी
लुटा रही सबको मदहोशी
गलियों का जो सन्नाटा है
तेरी दस्तक से ही आता है
तू प्रेम का उमड़ा राग भी है
विरह का दंश मारता नाग भी है
किसी योगी में उठता वैराग भी है
किसी शायर की महबूबा है
जो रोज तुझमें डूबा है।
तेरी पूनम दिन का एहसास देती।
अमावस खौफ का आभास देती।
तुझसे ही तो दिवाली है।
कही महफ़िल हुई मतवाली है।
तू विश्राम भरी आराधना भी है।
चकोर की साधना भी है।
मधुर यामिनी पलकों पे
निंदिया ले के आजा
तारों की चुनरी ओढ़ के
माथे चाँद दिखा जा

         

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