मन सागर

मन सागर
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अच्छा लगता है यूं ही,
किसी ख़्यालो में बहना।
उमंगो की सागर में,
अरमानो की नाव का,
यूं धीमी गति से बहना।
सरसराती हवाओं का,
यूं मुझे छू के जाना।
ठंडी सांसों में सुगंध बन,
यूं तेरा उतर जाना।
दिल की धड़कनो पे,
मुस्किल होता है,काबू पाना।
जब मेरे जहन में यूं तेरा आना।
अच्छा लगता है,
यूं किसी ख़्यालो में बहना।
कभी-कभी बहुत खलता है,
यूूं आसमान का इस कदर,
दूर हो जाना।
पंख नहीं है,फिर भी
मन का यूं पंछी बन,
गगन को छू आना।
अच्छा लगता है,
यूं ख़्यालो में बहना।
उफ़्फ़् तेरी चाहत यूं बिन मिले,
हृदय में बने रहना।
तुझे देखा भी नहीं,और
मेरा यूं तेरा हवाओं में,
चेहरा बनाना।
अच्छा लगता है, यूं ख़्यालो में बहना।
तेरा ख़्याल गुनगुनाना,
तुझे लफ्जो में ढालना।
हैरान कर देती है मुझे,
रिश्ता तेरा – मेरा यूं ,
कागज पे उतर आना।
अच्छा लगता है यूं,
ख़्यालो में बहना।
उमंगो की सागर में,
अरमानो की नाव का यूं,
धीमी गति से बहना।
साथी मुख़र्जी ( टीना )

         

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