मृग तृष्णा की तलाश

मृग तृष्णा की तलाश,
यौवन मद के सूखे सरिता में,
लहर उत्पन्न करने की,
भ्रमर ताल से निकल कोशिश ,
,सूखे निरझरिणी को फिर,
जीवन देने का प्रयास ,
या प्यार की गंगा बहानेसदृश्य
भागीरथ बनने का सद्प्रयास,
न जाने या जाने अनजाने
वही मृग तृष्णा सामने खड़ी
यौवन मद से ललचाती,
ह्रदय स्पंदन के गीत सुनाती
काले नयनो से,वार करती
घायल करने बाण छोड़ती
काले घने कुंतलों के बीहड़ में
राह भूलने को उद्द्यत कराती ,
गज गामिनी का उन्नत भाल,
हिरनी सी मतवाली चाल
मधुर कन्ठ कोयल सी बानी ,
मेनका बन ,मृग तृष्णा जगाती,
सूखे निर्झरिणी को फिर ,
यौवन मद से हरीतिमा बनाती ,
जैसे सूखे मुरझाए निष्प्राण सरिता में ,
जल प्लावन कर जीवन संगीत पिरोती,
कौन है वो ,,,नवीन की ,,
नवीन रचना ,,
जो एक नए गीत का ,
भ्रमर गान कराती ,
जीवन के भूले बिसरे पलो को ,
नव प्राण दे हरीतिमा बिखेर रही ,
नव उपवन में हरसिंगार की सेज सजाती,
सूखे मरू भूमि में ,
मधु रस घोल जीवन संचार कराती ,
नवरचना का मधुर तान दे ,
निश्छल प्यार की वृष्टि बरसाती,,
,सूखे निरझरिणी को फिर,
यौवन मद से सराबोर कराती ,
नव रचना मधुर रस बरसाती,,,
नवीन कुमार तिवारी ,,

         

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