युध्द विभीषिका

इंसान है की हैवान है ,
इतना न इतरा तू ,,,,,,,
,जो बैठा ढेर पे है ,
वो बारूद का है ,,
आज नहीं तो कल ,
तेरी बारी आएगी ,,
आज तू मार,
कल तेरी मौत ,
बिन बताये आएगी ,
यही कल चक्र की गति है
मौत ही शाशवत सत्य है ,
इतना न इतरा तू ,
कुछ तो दिल में ,
जगह बना तू ,
ऊपर जाने के पहले ,
हमसे ही निगाह मिला तू ,
जितना ही है तो ,
दिल जीत के दिखा तू ,
डैम न होने के कारन ही तो
आतंक की फिजा सजा रहा ,
कुछ तो सोच ,धर्मान्धता के नाम तू
अमन के नाम पर क्या तू ,,
आतंक ही फैला रहा तू ,,,
विनम्र श्रद्धांजलि असमय काल कवलित निर्दोष लोगो को ,,,,,
नवीन कुमार तिवारी ,,,,14.11.2015…….

         

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