ये कैसा युग बदला है

ये कैसा युग बदला है
ये कैसा वक्त आया है |
कल तक एक-दूसरे से
जो हाल पूछा करते थे
आज अपनेे मकानो मे
बन्द नज़र आते है|
दूसरो की बात सुन ले
इतना वक्त ही किसे है
सभी अपने ग़म से ही
परेशान नज़र आते हैं |
ये कैसा युग…..
कल तक चहचहाते थे
पँछी जहाँ पेड़ो पर
आज वहाँ खन्डहर
वीरान नज़र आते हैं |
बच्चे अब गलियों मे
खेलते नही
हर गली-कूचे सुनसान
नज़र आते है|
ये कैसा युग…
बेटियाँ बेख़ौफ घूमा करती थी
कल तक आज तो
हर कदम पर
हैवान नज़र आते है
नकाब लगा रखा है
लोगो ने चेहरे पर
अपने रिश्ते भी अब
अन्जान नज़र आते है

कैसा युग बदला है
ये कैसा….

श्वेता कुमारी

         

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