सच्चा प्यार

तन का तन से मिलना ही कोई प्यार नहीं है ,
दिल लेना दिल देना का कोई व्यापार नहीं है I
रब की मरजी से रूह से रूह का मिलन है ये ,
जोर जबरन से भरा कोई अत्याचार नहीं है ll
सुंदर सुरम्य सुमधुर एहसास है ये प्यार ,
साथी का अनमोल अटूट विश्वास है प्यार l
यूँ तो कुछ खास नहीं है इस ढ़ाई आखर में ,
सारे पोथी समेटे हुए कुछ तो खास है प्यार ll
प्यार में अपना और पराया कुछ नहीं होता है ,
अर्पण तड़पन के आलावा कुछ नहीं होता है l
अपना कुछ भी नहीं सब कुछ होता है साथी का ,
इसमें खुद को ही खुद का कोई सुध नहीं होता है ll
एक दूजे के जख्मो मिल कर सी लेता है ,
एक दूजे के आँखों का आँसू पी लेता हैं l
सारी खुशियां करता है एक दूजे के नाम ,
दर्द भरे लम्हो को बांट कर जी लेता है ll
******************************BP YADAV

         

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