सावन

सावन की यह काली घटा
देखो कितनी सुहावन इसकी छटा
बरसाती बूंदे अनमोल धरा
नदी तलाब जल कूप भरा
सावन की यह काली घटा
कितनी सुहावन इसकी छटा
वसुधा करती सब हरा भरा
जन जीवन चहुँ ओर बढ़ा

फिर झुम झुम मन नॉच उठा
सावन की यह काली घटा
कितनी सुहावन इसकी छटा

         

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