हमसफ़र बन साथ चला तो होता

हमसफ़र बन साथ चला तो होता,

ख्वाब कोई आंखों में पला तो होता.. 

ख्वाबों की दुनिया बसाने से पहले,

काश अंजाम टूटने का पता तो होता.. 

बेर जुठें सबरी के फेंकने से पहले, 

लक्ष्मण ने भाव प्रेम का समझा तो होता.. 

उन्हें गलतफहमी है हुस्ने-हूर होने का,

आईने का कभी उनसे सामना तो होता.. 

करता है दावें बहुत वो अपना होने का 

कभी किसी “अंजान” का हुआ तो होता..

 ………….आकर्षण दुबे ( अंजान )

         

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