अनुपलब्ध है जो

सुबह मुर्गों की बांग भी नहीं 

आँगन में गौरैया नहीं

 कोयल के गीत नदारद 

बाग़ नहीं फूलों के रंग नहीं

 गमले के फूलों पर तितली नहीं

 मधुमक्खी नहीं भँवरे भी नहीं 

पिट्ठू ,पकड़म-पकड़ाई खेलते

 चोर-पुलिस के दल में बंटे बच्चे

गुड़िया की शादी रचाती 

घर-घर खेलती बच्चियाँ

जाने कहाँ नदारद हैं

 अब इंटरनेट है यू ट्यूब है
जो बता दिया करता है कि

 मुर्गे की बांग गौरैया की चहचहाहट 

कोयल के सुर,फूल,तितली 

मधुमक्खी,भँवरे कैसे होते हैं 

अब कुछ संदेश आते हैं 

मैसेंजर ,व्हाट्सएप पर जो पूछते हैं प्रश्न 

कि आप में से किस किस ने खेले हैं 

ये सारे खेल 

विकास के इस युग में 

अब प्रकृति से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर

इंटरनेट में उपलब्ध है

 बस प्रकृति उपलब्ध नहीं 

बच्चों के लिए वीडिओ खेलों की भरमार है

 बस बचपन उपलब्ध नहीं I ©तनूजा उप्रेती,

         

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