अर्धांगिनी

विषय- अर्धांगिनी

संघर्ष पथ की संगिनी नारी तू पत्नी,
प्रिया,कभी धर्मपत्नी, अर्धांगिनी।

चलती रहती प्राण पथ हरदम अकेली
जीवन है पाषाण पथ,नहीं कोई सहेली।

कैद करती दुख के तिमिर को मुट्ठियों में ,
घर बसाती खुद को जलाकर,भट्टियों में।

हाथ थामे अर्धांगिनी, निभाती प्रत्येक वादा,
सात फेरे निभाने का रखती, रक्तिम इरादा।

चीर देती अपनी लगन से,सिंधु का सीना,
पावनी, निश्छल, निर्मल, नीलम नगीना।

नीलम शर्मा…✍

         

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