आज की नारी

विधा वर्णपिरामिड
मै
सीता
पावन
पवित्र हूँ
सहूँगी नही
जुल्म तेरे अब।।

ये
आज
की नारी
कमजोर
समझ मत
तेरी भूल है ये।।

हूँ
राधा
कोमल
सुकमारी
तेरी दामिनी
कमजोर नही हूँ।।

हूँ
नारी
कोमल
सुकमारी
समझ मत
कमजोर मुझे तू।।

🖋संध्या चतुर्वेदी

         

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