ऐसे मने दीवाली

मन के सारे द्वेष मिटाओ ,
हरो दिलों की पीड़ा ।
भेदभाव का भाव न रक्खें ,
बजे प्रेम की वीणा ।।
सबके घर में हो खुशहाली ,
माता ऐसे मने दिवाली।
सबके घर में हो खुशहाली ,
माता ऐसे मने दिवाली ।।

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई ,
सब है भाई भाई ।
मन में उजियाला हो जाए ,
हर घर बँटे मिठाई ।।
रोशन रात अमावस वाली ,
माता ऐसे मने दिवाली ।
सबके घर मे हो खुशहाली,
माता ऐसे मने दिवाली ।।

रचनाकार
गजेन्द्र मेहरा ‘साहिल’
गाडरवारा (म.प्र.)

         

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