कल का बल

यहा “कल”का तात्यापर्य
कल कारखाना मशीनो से है।
कलयुग अर्थात मशीनो का युग।।
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“कागज दिल” पर लिख कर सब को,
कुछ संदेश सुनाता हूॅ।
बात खली थी जो मेरे मन मे,
इस कविता मे बताता हूॅ।।
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छा गया दुनिया मे कलयुग,
अति भयंकर कल का बल।
छा गये संकट बादल के,
हाथ से निकले जीवन पल-पल।।
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कल के कारण कई लोग अब,
देख न पाये कल का कल।
रोज बढे मानव का दुशमन,
नये-नये रूपो मे कल।।
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होंय रोज देखो दुर्घटना,
किऐ राज जब से ये कल।
हो गया दूषित दुनिया के,
नदी तलाबो का सब जल।।
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रोक लगा दे आ ओ मिलकर,
नही बनाने दे अब कल,
वरना पश्चताओ गे एक दिन,
बस इतना बोले कौशल।।

         

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