कल लिखना है

दिल तू आज परेशां न हो ,
मुझको अपना कल लिखना है।
पल पल मुझको जो डसता था ,
ऐसा बो हरपल लिखना है ।।
आसतीन के साँप हुए है ,
जिनको तूने पाला है ।
गददारी यारों की देखी ,
माफ कर दिया छल लिखना है ।।
(दिल तू आज परेशां न हो ,
मुझको अपना कल लिखना है)
ठोकर कितनी बार है खाई ,
उठकर फिर भी खड़ा रहा हूँ ।
मजबूरी की जंजीरों में ,
कई साल तक पड़ा रहा हूँ ।।
इतनी धड़कन तेज हुई क्यों ,
शायद आज अकेला है ।
बुरे बक्त मे साथ न छोड़ा ,
किसका था बो बल लिखना है ।।
(दिल तू आज परेशां न हो ,
मुझको अपना कल लिखना है)
सपने ऊँचे देखे तूने ,
आसमान को पाना है ।
रोशन करना है इस जग को ,
खुद चंदा बन जाना है ।।
अपनी राह बनाते हम ही ,
और उसी पर चलते है ।
जो भी मेरे सफ़र को रोके ,
हर मुश्किल का हल लिखना है ।।
(दिल तू आज परेशां न हो ,
मुझको अपना कल लिखना है)

#_गजेन्द्र_मेहरा

         

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