कविता- देशवासियों अब तुम्हें भी जागना ही है

कविता
देशवासियों अब तुम्हें भी जागना ही है
देश का हित में कुछ तो बाटना ही है,
सीमा पर दुश्मनों ने जो मचाया तूफान
दाव पर लगीं भारत माता की शान है
दुष्ट पड़ोसी के मन पलते बुरे अरमान है|
देशवासियों अब तुम्हें भी जागना ही है.
बातों में हमारे मित्र बन कपट लिये सताते
छल में बल भर कर हमको आंखे दिखातें
भूले रहे मर्यादा वो शांति भंग की ठान है|
देशवासियों अब तुम्हें भी जागना ही है.
जो हमको दिल के करीबी लगता सदियों से
वो ही अहित करता ठान कर कव्जा बदियो से
तोड़-फोड़ में लगा रहता घूसबैठी सा फरमान है
देशवासियों अब तुम्हें भी जागना ही है|
माँ का आंचल धूमिल जाना इनकी नादानियो से
अज्ञात भय और सम्बेदना भड़काया कुर्वनियो से
जागो भारत के सपूतों अरि आदतें न नादान है|
देशवासियों अब तुम्हें भी जागना ही है
रेखा मोहन २३/११ /१८

         

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