कविता

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हाँ जी महिला दिवस की बधाई।
बोलते तुम्हें शर्म जरा भी न आई।

देख दर्द निर्भया का बना कानून।
बड़ा छाया था दिल्ली में जुनून।
जुटाया पैसा जो नारी हित को,
आधा भी सरकार न खर्च पाई।
हाँ जी महिला दिवस की बधाई।

जलेगी तेजाब से तो दोगे पैसा।
किया न जतन कि न हो ऐसा।
शर्म करो संसद वालो अब तो,
हो रही भारत की जग हंसाई।
हाँ जी महिला दिवस की बधाई।

मां महिला बहन और बेटी महिला।
सोचो क्या नहीं तुम्हें देती महिला।
हवश के दरिंदों बेटी भी न बक्शी,
तुम्हें क्या जरा भी लाज ना आई।
हाँ जी महिला दिवस की बधाई।

आज फिर बड़े बड़े भाषण होंगे।
हिमालय जितने आश्र्वासन होंगे।
आज होगा महिमामंडन बहुत सा,
कल को भूल जाएंगे सब भाई।
हाँ जी महिला दिवस की बधाई।

नाच रहा दुःशासन है कृष्ण मौन।
द्रोपदियों को अब बचाए कौन।
आँख फाड़े देखते सब जिस्म,
किसी ने न चुनर उनपे ओढ़ाई ।
हाँ जी महिला दिवस की बधाई।

हाँ जी महिला दिवस की बधाई।
बलबीर

         

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