गोदभराई

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#गोदभराई

मेरी कविता
तुम्हारे कवि मन की
ब्याहता हुई
!!
व्याकरण का भाव सौंदर्य
उच्चारण के मंत्र
शब्द शैली की लगनवेदी पर
क्षणिका गठबंधन हुई
!!
धीरे धीरे
मन आँगन में भाषाशिल्प
बिम्ब रचने लगा
नाद और लय का संगम
नव रस को अलंकृत करने लगा
!!
दैहिक संज्ञा को भुलाए
मनसा समागम में लीन हो कर
गद्य पद्य से पूरित
उपमाएँ मेरे अंक में तुम्हारा
अंश हुई
!!
नन्हें छंद
नटखट तुकांतक
मासूम सी आहट देने लगे
सप्तम मास में
उत्तम समास के शुभांक हेतु
संस्कारित पूजा संपन्न हुई
!!
रे कवित्त !!
रे कौशल्य !!
तुमसे जुड़े अभिमंत्रित धागे से
बुरी शक्तियों का हनन हुआ
यूँ सी पवित्रा का
अलौकिक गर्भाधान हुआ
यूँ सी तुम्हारी
पावन काव्या की
सुसंस्कारित गोदभराई हुई

💫दीप💫

         

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