चित्र चिंतन

उठा किताब कलम को ।
तू थाम ज्ञान विज्ञान को ।
कर पथ रोशन अपना ,
तू बना सहारा ज्ञान को ।

जकड़ न लें बेड़ियाँ तुझको ।
जकड़े पराधीन बंधन तुझको ।
तोड़ बेड़ियाँ कुंठित बंधन की ।
स्वयं सहारा दे तू खुदको ।
….. विवेक दुबे”निश्चल”@…

         

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