चुप रहे

रात जागती रही
ख्याल चुप रहे
ख्वाबों के गांव में
सवाल चुप रहे
!!
राख दहकती रही
चिराग चुप रहे
बूँदों की चाह में
बवाल चुप रहे
!!
शाख मचलती रही
पराग चुप रहे
कागज़ पर देखो
उबाल चुप रहे
!!
चिनार पर शमा जलती रही
बिखरे रहे तन्हा
किनारों पर ताउम्र
सैलाब चुप रहे
♦️
मनु

         

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