चैतन्य राग

✍️……#चैतन्य_राग~

यूँ ही नहीं उठा है निनाद मेरे भीतर
कोई तो ले रहा है विस्तार मेरे भीतर
!!
ये दिव्य कल्पना है या है यथार्थ वाणी
जय घोष कर रहा है ये कौन मेरे भीतर
!!
संगम के घाट पर जब उठती तरंग कोई
चैतन्य राग बन कर गाता है कौन भीतर
!!
दैवत्व दीप जागे निष्काम देह त्यागें
वैराग्य लौ जलाए बैठा है कौन भीतर

💫दीप💫

         

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