जमाना बदल रहा है।

*कहत हें बड़ें बुजुर्ग,जमाना बदल रहा है
हाथ्यन का काम त,मशीनन मा ढल रहा हैं।।
जमाना बदल रहा हैं।……

*कहत हे जब या बात,त उनके दिलमा उठत ही पीरा।
का सोच के कहतह हें दद्दू,पता नहिआय कुछू पूरा।।
पता करेन त पता चला,उइ बीती बात बताउत हें।
पइदल चलैं का कहत हेमय, कपड़ा खादी पहिराउत हें।।
छूट गे दादू धोती कुर्था,पइजामउ नही बचा है।।
जमाना बदल रहा हैं…….1

*पहिले रातके अधिआरे मा,बियारी करत रहे हें।
लाइट कहाॅ रही ही उई दिन,डब्बी लये पढात रहे हें।।
हाथ से पीसै हाथ से प्वामय,स्वाद बहुत बढिया था।
भात चुरामय हड़ियन माही,खाय का तो पत्ता था।।
चलेगें उइ दिन,जब चलत रहे है जेतबा।
अब जेतबन का काम तो चक्किन मा चल रहा है।।
जमाना बदल रहा हैं…….2

*बची नही कुछू लाज सरम,अउर बची नही मरियादा।
होत से द्याखा बनत हे बेटा,अपनेन बाप के दादा।।
कहय बाप कुछू अउर,मगर बेटबा कुछू अउर करत हें।
बाप न एकठे लउग चबाइन,बेटा दारू पिये मरत हें।।
अब बची नही कुछू परमपरा,न बची संस्कृति भारत केर।
बगिहय अब नंगे लोग सबै,या दाहिया “कगज दिल”माही लिख रहा है।।
जमाना बदल रहा हैं…….3
*घरमा बइठे अब बात करा,वा भगा जमाना चिट्ठी का।फैसन के आगे मोल नही,पहिचानय अपने मिट्टी का।।
काचन के गिलाशे लइआये,अब पिअय का पानी फैसन मा।
डिस्पोजल लइके बागतहे,का चल पाई अब अइसन मा।।
माटी केर बर्तन फइक दिहिन,अनमास लिहिन अब प्लास्टीक का।
अगरेंजन के नये बिचारन मा,भूल के आपन वास्तविक का।।
अब कहा हे उइ दिन,जब चलत रहे हें कुल्लहड़।
अब कुल्लहड़ का काम तो,डिस्पोजल मा चल रहा है।।
जमाना बदल रहा हैं…….4

*थ्वरकौ दादू जो मूड़ चढै,जल्दी से बिस्तर पकड़त हे।
देशी इलाज का छोड़ दिहिन,अगरेंजी गोली कतरत हे।।
सब बने आलसी पड़े रहय,अब खाय के गोली अगरेंजी।
देशी इलाज का भुलय दिहिन,जबसे आई या अगरेजी।।
अब चलेगे उई दिन,जब चलत रहे हे कढा।
अब काढन का काम तो टानिक ढल रहा है।।
जमाना बदल रहा हैं…….5
कहत हें बड़ें बुजुर्ग,जमाना बदल रहा है।
हाथ्यन का काम तो  अब मशीनन मा ढल ……

रहा है!!

         

Share: