-ज़िन्दगी –

दो दिन की
ज़िन्दगी है
एक पल है तो
दूजे पल नही है
फिर क्यूँ
व्यस्त इस ज़िन्दगी मे
अपनो के लिए
दो पल नहीं है
ना जाने कब
ज़िन्दगी की रात
अँधेरी हो जाए
और देखते ही देखते
कोई गहरी नींद मे
सो जाए
इससे पहले
जागो तुम
पैसे के पीछे
मत भागो तुम
एक-दूसरे को
प्यार दो
खुशियाँ और
दुलार दो
किसे पता है
फिर इस
दुनियाँ मे
आना है
नहीआना है
राजा हो या रंक
सभी को
काँधे पर ही
जाना है
फिर क्यूँ झूठा
अभिमान करे
आओ मिलकर
परमार्थ करे
दो दिन की
ये ज़िन्दगी है
एक पल है
दूजे पल नहीं है|

श्वेता कुमारी

         

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